पत्नी की हत्या कर 15 साल तक फरार रहा पति, एक फोन कॉल ने खोल दिया पूरा राज!

A shocking true crime story about a husband who murdered his wife, changed his identity and escaped police for 15 years. Discover how one phone call finally exposed his secret.

MURDER MYSTERIESTRUE CRIME STORIES

Crime Empire

10/31/20261 min read

जिस आदमी को पुलिस पिछले 15 सालों से तलाश रही थी, वह हजारों किलोमीटर दूर एक नई पहचान के साथ अपनी जिंदगी जी रहा था। उसने दूसरी शादी कर ली थी, उसके दो बच्चे भी हो चुके थे और वह एक कंपनी में नौकरी करके बिल्कुल सामान्य जिंदगी बिता रहा था। उसकी पत्नी को भी नहीं मालूम था कि जिस आदमी के साथ उसने अपना घर बसाया है, उसका एक ऐसा अतीत है जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं।
लेकिन इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह है कि जिस आदमी ने अपनी पहचान बदलने के लिए इतने साल लगा दिए, जिस आदमी ने अपने पुराने परिवार से दूरी बना ली और जो हर कदम पर पुलिस से बचने की कोशिश करता रहा, उसकी पूरी जिंदगी सिर्फ एक फोन कॉल की वजह से बदल गई।
यह फोन कॉल उसने अपनी मां को किया था। शायद उस वक्त उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसकी यह छोटी-सी गलती पुलिस को सीधे उसके पास पहुंचा देगी।
कहानी शुरू होती है तरुण और सजनी की शादी से। दोनों की शादी को अभी सिर्फ तीन महीने ही हुए थे। घर में नई-नई शादी की खुशियां थीं। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों मिलकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करेंगे। लेकिन किसी को नहीं पता था कि इस घर में जल्द ही ऐसा मातम छाने वाला है, जिसकी वजह जानने में पुलिस को कई साल लग जाएंगे।
एक दिन अचानक सजनी की हत्या हो जाती है।
घरवालों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। किसी को समझ नहीं आता कि आखिर सजनी का दुश्मन कौन था और किसने उसकी जान ले ली। घर में चीख-पुकार मची हुई थी। पुलिस को सूचना दी जाती है और जांच शुरू हो जाती है।
दूसरी तरफ तरुण की हालत भी बेहद खराब बताई जाती है। वह गहरे सदमे में दिखाई देता है। अगले दिन सजनी का पोस्टमार्टम कराया जाता है और फिर अंतिम संस्कार की तैयारी होती है। लेकिन तरुण की हालत ऐसी नहीं थी कि वह अपनी पत्नी को मुखाग्नि दे सके। आखिरकार उसके बड़े भाई को यह जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
परिवार के लोगों को लग रहा था कि किसी अनजान अपराधी ने उनके घर की खुशियां छीन ली हैं। लेकिन असली कहानी तो अभी शुरू भी नहीं हुई थी।
सजनी की हत्या के बाद पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने लगती है। इलाके में कौन आया था, किसने कुछ संदिग्ध देखा था और किसका व्यवहार असामान्य था, इन तमाम बातों की जानकारी जुटाई जाती है। पुलिस को शुरुआत में यही लगता है कि शायद किसी बाहरी व्यक्ति ने घर में घुसकर सजनी की हत्या की होगी।
लेकिन तभी एक ऐसी घटना होती है, जिससे पुलिस भी हैरान रह जाती है।
सजनी की हत्या के कुछ समय बाद तरुण अचानक गायब हो जाता है। वह अस्पताल से भी लापता हो चुका था। जिस आदमी की पत्नी की हत्या हुई थी, वही आदमी अब किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।
पुलिस के लिए यह बात बेहद अजीब थी। आखिर तरुण कहां चला गया? क्या वह किसी मुसीबत में फंस गया था? क्या किसी ने उसका अपहरण कर लिया था? या फिर इस पूरी घटना के पीछे कोई ऐसी सच्चाई थी, जिसे अभी तक पुलिस समझ नहीं पाई थी?
पुलिस ने उसके परिवार से पूछताछ शुरू की। यहां तक कि उसके बड़े भाई को भी हिरासत में लेकर सवाल किए गए। लेकिन तरुण का कोई पता नहीं चला।
धीरे-धीरे मामला मीडिया तक पहुंच गया। सजनी के परिवार की तरफ से पुलिस पर दबाव बढ़ने लगा। उन्हें अपनी बेटी के कातिल की तलाश थी। वे चाहते थे कि पुलिस किसी भी कीमत पर आरोपी को पकड़कर सामने लाए।
इसी दौरान जांच में पुलिस को तरुण की जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा राज पता चलता है, जो इस हत्या की वजह समझने में मदद कर सकता था।
पता चलता है कि तरुण का शादी से पहले एक दूसरी लड़की के साथ प्रेम संबंध था। वह उस लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन किसी कारण से दोनों की शादी नहीं हो सकी। इसके बाद तरुण की शादी सजनी से हो गई।
पुलिस उस लड़की तक पहुंचती है और उससे पूछताछ करती है।
लड़की बताती है कि सजनी की हत्या के दो दिन बाद तरुण ने उसे फोन किया था। फोन पर तरुण ने उससे कहा था कि अब हम दोनों शादी कर सकते हैं।
लेकिन उस लड़की को तब तक सजनी की मौत के बारे में पता चल चुका था। उसने तरुण से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। उसका कहना था कि जिस आदमी की पत्नी की अभी-अभी हत्या हुई हो, उसके साथ वह अपनी जिंदगी नहीं बिता सकती।
पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज किया और जांच के बाद उसे इस मामले में निर्दोष मान लिया।
अब पुलिस के सामने एक संभावित मकसद था। क्या तरुण अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था? क्या सजनी से शादी के बाद भी वह अपनी पुरानी प्रेमिका को नहीं भूल पाया था? और क्या इसी वजह से उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी?
पुलिस का शक तरुण पर लगातार गहराता जा रहा था, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि तरुण कहीं मिल ही नहीं रहा था।
साल गुजरने लगे। सजनी के परिवार की उम्मीदें धीरे-धीरे टूटने लगीं। उन्हें लगने लगा था कि शायद उनकी बेटी का कातिल कभी नहीं मिलेगा।
उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की। लगातार मदद की गुहार लगाई। आखिरकार परिवार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की और इस मामले में मदद मांगी।
इसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई। तरुण की जानकारी देने वाले के लिए एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया।
पुलिस ने पुराने सबूतों की दोबारा जांच की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ध्यान से देखा गया। रिपोर्ट से पता चला कि सजनी की मौत गला घोंटने की वजह से हुई थी।
अब पुलिस को यह भी समझ आने लगा था कि मामला किसी सामान्य लूटपाट का नहीं था।
लेकिन तरुण का कोई सुराग नहीं मिल रहा था।
उसके परिवार पर नजर रखी जाने लगी। पुलिस सादे कपड़ों में लोगों को तैनात करती थी। उम्मीद थी कि कभी न कभी तरुण अपने परिवार से मिलने जरूर आएगा। अगर ऐसा हुआ तो पुलिस उसे पकड़ सकती है।
इसी बीच तरुण के पिता की मृत्यु हो गई।
कई साल बाद तरुण अपने माता-पिता से मिलने पहुंचा था। अपने बेटे को इतने साल बाद देखकर माता-पिता भावुक हो गए। लेकिन वे जानते थे कि उनका बेटा पुलिस की तलाश में है। अगर किसी ने उसे पहचान लिया तो वह पकड़ा जा सकता है।
यह मुलाकात ज्यादा समय तक नहीं चली। तरुण वहां से फिर गायब हो गया।
कुछ समय बाद उसके पिता की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
पुलिस के लिए यह मामला अब एक ऐसी पहेली बन चुका था, जिसका कोई सिरा हाथ नहीं आ रहा था।
कभी खबर मिलती कि तरुण गुजरात में देखा गया है। कभी मध्य प्रदेश में उसकी मौजूदगी की बात सामने आती। कभी बेंगलुरु तो कभी केरल से जुड़ी जानकारी मिलती। पुलिस हर सूचना पर जांच करती, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता।
एक तरफ तरुण अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा था और दूसरी तरफ पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी।
इस बीच तरुण ने अपनी मां से संपर्क बनाए रखने के लिए भी सावधानी बरती। वह सीधे अपने पुराने मोबाइल नंबर से बातचीत नहीं करता था। उसकी मां ने एक अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल भी किया हुआ था, जो एक रिश्तेदार के नाम पर था। पुलिस के लिए इन नंबरों को जोड़ना आसान नहीं था।
समय बीतता गया और करीब 15 साल गुजर गए।
अब पुलिस के सामने एक ऐसा सुराग आया, जिसने पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी।
तरुण की मां के मोबाइल पर एक दिन बेंगलुरु के लैंडलाइन नंबर से फोन आया।
पुलिस की नजर पहले से ही उसके परिवार के फोन नंबरों पर थी। जैसे ही यह कॉल रिकॉर्ड में आई, अधिकारियों ने नंबर की जांच शुरू कर दी।
पता चला कि यह किसी आम व्यक्ति का नंबर नहीं, बल्कि बेंगलुरु की एक कंपनी के कस्टमर केयर सेंटर का लैंडलाइन नंबर था।
अब पुलिस के मन में सवाल उठा कि आखिर तरुण की मां को उस कंपनी से फोन क्यों आया?
क्या तरुण उस कंपनी में काम करता था?
क्या इतने सालों से पुलिस जिस आदमी को तलाश रही थी, वह बेंगलुरु में किसी कंपनी के अंदर नौकरी कर रहा था?
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने इस सुराग को गंभीरता से लिया और बेंगलुरु पहुंच गई।
पुलिस ने कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी। अधिकारियों को यह नहीं बताया गया कि वे खास तौर पर किस आदमी को तलाश रहे हैं।
कंपनी के कर्मचारियों की सूची पुलिस के सामने आई। उसमें तरुण पटेल नाम का कोई व्यक्ति नहीं था।
लेकिन एक नाम ऐसा था, जिसे देखकर पुलिस अधिकारियों का ध्यान अचानक रुक गया।
उसका नाम था प्रवीण पटेल।
पुलिस ने इस आदमी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। पता चला कि वह कई सालों से कंपनी में काम कर रहा है। उसकी शादी निशा नाम की महिला से हुई है और उसके दो बच्चे भी हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि तरुण की मां का संपर्क प्रवीण पटेल और उसकी पत्नी निशा से भी था।
अब पुलिस को शक होने लगा कि कहीं यही प्रवीण पटेल तो तरुण नहीं है?
लेकिन सिर्फ शक के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था। पुलिस को ऐसी पहचान चाहिए थी, जिससे यह साबित हो सके कि वह आदमी तरुण ही है।
जांच के दौरान पुलिस को तरुण की एक पुरानी शारीरिक पहचान याद आई। उसके हाथ की एक उंगली में पुरानी चोट के कारण अलग तरह का निशान और बनावट थी।
पुलिस अधिकारियों को उम्मीद थी कि अगर सामने वाला व्यक्ति वही तरुण है तो इस निशान से उसकी पहचान हो सकती है।
आखिरकार वह दिन आ गया, जब पुलिस टीम बेंगलुरु के उस ऑफिस पहुंची जहां प्रवीण पटेल काम करता था।
अधिकारी ऑफिस की सातवीं मंजिल पर पहुंचे। वहां कर्मचारियों के बीच प्रवीण पटेल भी काम कर रहा था।
कुछ देर बाद उसे बुलाया गया।
वह सामने आया तो पुलिस अधिकारियों ने उससे सामान्य बातचीत शुरू की। उसे शायद जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिन लोगों से वह बात कर रहा है, वे पिछले 15 साल से उसकी तलाश कर रहे हैं।
फिर एक अधिकारी ने उससे हाथ मिलाया।
बस, इसी पल पुलिस की नजर उसके हाथ पर गई।
वह पुराना निशान सामने था।
अधिकारियों को समझ आ गया कि उनके सामने खड़ा आदमी कोई प्रवीण पटेल नहीं, बल्कि वही तरुण है, जिसकी तलाश में पुलिस ने अपनी जिंदगी के कई साल लगा दिए थे।
15 साल तक नाम बदलकर रहने वाला आदमी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में था।
अब सवाल था कि तरुण ने इतने सालों तक अपनी असली पहचान कैसे छिपाई?
पूछताछ में उसने अपनी जिंदगी के कई राज खोले।
उसने बताया कि सजनी की हत्या के बाद वह अपनी पुरानी जिंदगी से दूर भाग गया था। वह पहले दिल्ली पहुंचा और वहां एक कॉल सेंटर में नौकरी करने लगा।
इसके बाद वह पुणे पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात निशा नाम की एक लड़की से हुई।
तरुण ने निशा को बताया कि वह अनाथ है और दुनिया में उसका कोई नहीं है। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर दोनों ने शादी कर ली।
कुछ समय बाद दोनों बेंगलुरु चले गए। वहां तरुण ने नौकरी शुरू कर दी। दोनों के दो बच्चे भी हुए।
निशा को हमेशा यही लगता रहा कि उसका पति प्रवीण पटेल है। उसे उसके पुराने जीवन के बारे में कुछ मालूम नहीं था।
जिस आदमी को गुजरात पुलिस 15 साल से तलाश कर रही थी, वह किसी दूसरे नाम से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक नई जिंदगी जी रहा था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था।
आखिर तरुण ने अपना नाम प्रवीण पटेल कैसे रख लिया?
पूछताछ में पता चला कि कॉलेज के दिनों में उसका एक दोस्त था, जिसका नाम भी प्रवीण पटेल था। दोनों साथ पढ़ते थे और तरुण को अपने इस दोस्त के बारे में काफी जानकारी थी।
तरुण ने अपने दोस्त की पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों की जानकारी हासिल करके उसने अपनी तस्वीर के साथ नई पहचान तैयार कर ली।
इसके बाद वह उसी पहचान के सहारे नौकरी करता रहा और अपनी पुरानी जिंदगी को छिपाता रहा।
उसकी पत्नी को भी उसके असली नाम और अतीत के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
इस तरह एक आदमी ने अपनी पहचान बदलकर दूसरी शादी कर ली, दो बच्चों का पिता बन गया और करीब 15 साल तक पुलिस से बचता रहा।
लेकिन अब पुलिस को उस सबसे छोटी गलती का जवाब भी मिल चुका था, जिसने इतने सालों का उसका बनाया हुआ खेल खत्म कर दिया।
वह गलती थी अपनी मां को ऑफिस के लैंडलाइन नंबर से फोन करना।
उस दिन उसके मोबाइल से मां से संपर्क नहीं हो पा रहा था। मां से बात करना जरूरी था, इसलिए उसने ऑफिस में बैठे-बैठे कंपनी के लैंडलाइन नंबर से फोन कर दिया।
शायद उसने सोचा भी नहीं होगा कि यह कॉल पुलिस के रिकॉर्ड तक पहुंच जाएगी।
अगर वह उस दिन ऑफिस के लैंडलाइन से फोन नहीं करता, तो शायद पुलिस को बेंगलुरु का यह सुराग नहीं मिलता।
लेकिन अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, उसकी कोई न कोई कड़ी पीछे छूट ही जाती है।
तरुण को गिरफ्तार करके अहमदाबाद लाया गया। पूछताछ में उसने सजनी की हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली।
जिस आदमी ने अपनी पत्नी की हत्या के बाद अपनी पहचान बदल ली थी, जिसने दूसरी शादी कर ली थी और जो दो बच्चों का पिता बनकर सामान्य जिंदगी जी रहा था, आखिरकार उसे कानून के सामने आना पड़ा।
इस पूरी कहानी में सबसे दुखद बात यह थी कि सजनी की जिंदगी शादी के सिर्फ तीन महीने बाद खत्म हो गई। उसके परिवार को अपनी बेटी के कातिल को देखने के लिए 15 साल इंतजार करना पड़ा।
और दूसरी तरफ तरुण ने इन 15 सालों में एक नई दुनिया बसा ली थी।
उसने सोचा था कि नाम बदलने से वह अपने अतीत से दूर हो जाएगा। लेकिन वह भूल गया था कि इंसान अपनी पहचान छिपा सकता है, अपनी गलतियों का इतिहास नहीं।
आखिर में एक छोटी-सी फोन कॉल ने उस राज को खोल दिया, जिसे वह 15 साल से अपने सीने में दबाकर बैठा था।
कहते हैं कि अपराध करने के बाद इंसान कितना भी शातिर क्यों न हो जाए, एक न एक दिन कोई न कोई गलती जरूर कर बैठता है।
तरुण के साथ भी यही हुआ।
जिस फोन से वह अपनी मां से बात करना चाहता था, उसी फोन ने उसकी 15 साल पुरानी पहचान पुलिस के सामने खोलकर रख दी।